Dr.APJ Abdul Kalam Ji,
कुछ शब्द जो लोगो की दिल की गहराइयो से कलाम जी लिए लिखे गए
कुछ शब्द जो लोगो की दिल की गहराइयो से कलाम जी लिए लिखे गए
- बोलते-बोलते अचानक धड़ाम से
जमीन पर गिरा एक फिर वटवृक्ष
फिर कभी नहीं उठने के लिए
वृक्ष जो रत्न था
वृक्ष जो शक्तिपुंज था
वृक्ष जो न बोले तो भी
खिलखिलाहट बिखेरता था
चीर देता था हर सन्नाटे का सीना
सियासत से कोसों दूर
अन्वेषण के अनंत नशे में चूर
वृक्ष अब नहीं उठेगा कभी
अंकुरित होंगे उसके सपने
फिर इसी जमीन से
उगलेंगे मिसाइलें
शान्ति के दुश्मनों को
सबक सीखने के लिए
वृक्ष कभी मरते नहीं
अंकुरित होते हैं.
नए-नए पल्ल्वों के साथ
वे किसी के अब्दुल होते हैं
किसी के कलाम
अलविदा .अलविदा ,अलविदा
- आधुनिक भारत के भगवान चले गए। इस देश के असली स्वाभिमान चले गए।। धर्म को अकेला छोड़ विज्ञान चले गए। एक साथ गीता और कुरान चले गए।। मानवता के एकल प्रतिष्ठान चले गए। धर्मनिरपेक्षता के मूल संविधान चले गए।। इस सदी के श्रेष्ठ ऋषि महान चले गए। कलयुग के इकलौते इंसान चले गए।। ज्ञान राशि के अमित निधान चले गए।। सबके प्यारे अब्दुल कलाम चले गए।।..i Sailut u Sir..आपको अश्रुपुर्ति श्रद्धाजली..,,
- कलियुग की रामायण का राम चला गया.. मेरे देश का कलाम चला गया... जो देता था एकता का पैगाम वोह कलाम चला गया .... जिनसे हुई दुश्मनो की नींद हराम वोह कलाम चला गया ... जिसने दिया देश को परमाणु सलाम वोह कलाम चला गया क्या बताऊ दोस्तोंवतन का सबसे बड़ा हमनाम चला गया ... मेरा कलाम चला गया.. हमारा कलाम चला गया... ये सुनकर मेरा दिल रो दिया... मेरे देश ने एक रत्न खो दिया। सच में रुला दिया इस खबर ने! झकझोर दिया इस खबर ने ! भारत ने आज एक हिरा खो दिया ! आप बहुत याद आओगे कलाम सर ! ... न हिन्दु दिखता था न मुसलमान दिखता था।उसे तो बस इन्सानो मे इन्सान दिखता था।हो ग्ई आज खामोश वो आवाज सदा के लिए ।जिसकी बातो मे केवल हिन्दुस्तान दिखता था। i will miss u always........ kalam sir.... भगवान् उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे ॐ शांति
- चन्द लाइने कलाम सर के लिए --- झुका दो तिरंगे कुछ पल के लिए ,
जा रहा वीर भारत कफ़न को लिए । दे दिया ज्ञान अपना वतन के लिए , खुल गयी
जन्नते उस खुदा के लिए । झुका दो तिरंगे कुछ पल के लिए , जा रहा रत्न भारत
अलविदा के लिए ।। : चंद ही सच्चे मुसलमान , वो भी हमें छोड़ के चले गये...
सुबह 3 मुसलमानों की वजह से देश रोया था , रात को एक मुसलमान देश को रुला
गया... शत शत नमन
आज जन्नत में बहुत चहल पहल होगी.....
हिन्दुस्तान की धरती से कुछ शहीदों की और कलाम
साहब जैसे फरिश्तों की फौज़ निकली हैं.....
दिल में गीता और जुबां पे कुरान दिखा देना!
कभी मिले तो कलाम साहब जैसा मुसलमान दिखा देना!!
दरगाह पे मत्था टेकता हिन्दू बहुत देखा है!
कभी कृष्ण की भक्ति में डूबा खान दिखा देना!!
वो ज्ञान थे विज्ञानं थे ,
हर दिल की वो जान थे।
कैसे भूलेंगे उनको ,
ऐसे वो इन्सान थे ,
न वो हिन्दू थे न वो '
मुसलमान थे ,
वो तो सिर्फ और सिर्फ महान थे
- He did not die while resting on his sofa. He did not die eating his favorite food at a posh restaurant. He did not die while signing his cheques. He did not die sick in his comforting bed. He died while he was interacting with students which has always been his favorite thing in the world. Dieing while doing our most loved thing. How many of us are going to do it? His body may have left. His 'Wings of Fire' has no death. They'll always flutter in air. All around us. When you live, live like him. When you die, die like him. RIP Dr. APJ Abdul Kalam. Heaven is lucky from now! Anonymus
- आज समय का पहिया घूमा,पीछे सब कुछ छूट गया, एक सितारा भारत माता की आँखों का टूट गया,
उसकी आँखे बंद हुयी तो पलकें कई निचोड़ गया, सदियों तक न भर पायेगा,वो खाली पन छोड़ गया,
ना मज़हब का पिछलग्गू था,ना गफलत में लेटा था, वो अब्दुल कलाम तो केवल भारत माँ का बेटा था,
बचपन से ही खुली आँख से सपने देखा करता था, नाविक का बेटा हाथों में सात समंदर भरता था,
था बंदा इस्लाम का लेकिन,कभी न ऐंठा करता था, जब जी चाहा संतो के चरणों में बैठा करता था,
एक हाथ में गीता उसने एक हाथ क़ुरआन रखा, लेकिन इन दोनों से ऊपर पहले हिन्दुस्तान रखा,
नहीं शरीयत में उलझा वो,अपनी कीमत भांप गया, कलम उठाकर अग्निपंख से अंतरिक्ष को नाप गया,
दाढ़ी टोपी के लफड़ों में नही पड़ा,अलमस्त रहा, वो तो केवल मिसाइलों के निर्माणों में व्यस्त रहा,
मर्द मुजाहिद था असली,हर बंधन उसने तोडा था, अमरीका को ठेंगा देकर,एटम बम को फोड़ा था,
मोमिन का बेटा भारत की पूरी पहरेदारी था, ओवैसी,दाऊद,सौ सौ अफज़ल गुरुओं पर भारी था,
आकर्षक व्यक्तित्व,सरल थे,बच्चों के दीवाने थे, इस चाचा के आगे,चाचा नेहरू बहुत पुराने थे,
माथे पर लटकी ज़ुल्फ़ों ने पावन अर्थ निकाल दिया, यूँ लगता था भारत माँ ने आँचल सर पर डाल दिया,
गौरव है तुम पर,फक्र लिए हूँ सीने में, जीना तो बस जीना है अब्दुल कलाम सा जीने में,
माना अब भी इस भारत में कायम गज़नी बाबर हैं, लेकिन ऐसे मोमिन पर सौ सौ हिन्दू न्योछावर है कलाम sir Aap ko सलामAnonymus






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